सोमवार, 23 नवंबर 2020

मेरे राम

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
अभिलाषा इस जीवन का है ,चाहे मन ये सुबहो शाम ।
देखु नयनभर होकर पुलकित , कब आओगे मेरे राम।।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
अंतर्मन मेरा महक उठा बस,
अनुभव को पाकर के तुम्हारा।
स्मृति में आते ही  झुक जाए,
चरणों मे ये शीश  हमारा ।
हर पल तुझको ही मैं गाऊ,
रैन दिवस नित आठो याम।
देखु नयनभर होकर पुलकित ,
कब आओगे मेरे राम ।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
कितना प्यारा आकर्षक छबि,
अपनी ओर है मुझे बुलाते ।
मानव मात्र के हृदय पटल पर ,
अपनी दिव्य छटा बिखराते।
इस अनूप छवि को निहारकर ,
व्याकुल मन पाए विश्राम ।
देखु नयनभर होकर पुलकित ,
कब आओगे मेरे राम ।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
प्यासे मन को तृप्ति मिले जहाँ,
दिव्य सुधारस केवल तुम्ह हो ।
आच्छादित जिसकी खुशबू से ,
इस तन वन का चन्दन तुम्ह हो ।
जिसके चरित विटप के निचे ,
बैठ सदा ही मिले आराम ।
देखु नयनभर होकर पुलकित ,
कब आओगे मेरे राम ।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
परमारथ के मारग  पर चल
मानव मानव है बन सकते ,
होकर ही अभिमान शून्य हम,
यश के भागी हम बन सकते ।
मानवता के  सम्बन्धों को ,
करते तुम्हि परिभाषित राम।
देखु नयनभर होकर पुलकित ,
कब आओगे मेरे राम ।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
अछूत नही कोई जाति धर्म से ,
किसने है ये भरम फैलाया ।
निज स्वारथ के सिंहासन पर ,
बैठ के राम को दोष लगाया ।
केवट से मिलकर तुम्ह आओ ,
तब कहना है दोषी राम ।
देखु नयनभर होकर पुलकित ,
कब आओगे मेरे राम ।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
अवध भूमि की पावनता अरु,
सरयू की अति शुचि जलधारा।
श्रृंगवेरपुर  गंगा  का तट 
चित्रकूट दण्डकवन  सारा ।
तेरी दिव्य सुरति कर जाती ,
ये सारे अति पावन धाम ।
देखु नयनभर होकर पुलकित ,
कब आओगे मेरे राम ।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
रिश्तों की जिस  मर्यादा को,
तुमने था सुदृढ  बनाया ।
वचनबद्धता क्षमा करुणा को ,
मानवता का रीढ़ बनाया ।
टूट रही अब  सब मर्यादाएं।
ना जाने कब मिले विराम।
देखु नयनभर होकर पुलकित ,
कब आओगे मेरे राम ।

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐


समय




वृक्ष




अहंकार



चलता ही जाऊंगा




अधिकार 














 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नई आस

                 नई आस                कल्पना साकार होता दिख रहा है, आसमाँ फिर साफ होता दिख रहा है।। छाई थी कुछ काल से जो कालिमा, आज फिर से ध...