मंगलवार, 9 मार्च 2021

पाखण्डता

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है सिलसिला ये कैसा,  राह- ए- मजार में ,
खबर नही किसी को,  पर चल रहे हैं सब।
मन मे लिए उमंगे न , जाने किस बात की,
पाने को सुख कौन सा , मचल रहे हैं सब ।

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फैला के वो अशांति,  पाने चले हैं शांति ,
जो कर रहे हैं क्रांति , घर मे समाज मे ।
खुद को कहे वेदांती , फैलाये वही भ्रांति,
दुनिया है जिसको जानती,  गृहकलह काज में।

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मन मे है कलुषताई , तनिक भी न मनुषाई,
हैवानियत है छाई , नजरो में जिसके देखो ।
है बन के वही साई ,  मानवता को ठगे भाई,
जग में है भ्रम फैलाई ,जरा खोल आंखे लेखों।

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अधरों में प्रीति छाई , कपट हृदय में समाई,
पावक है वो लगाई ,  मदमस्त शांती वन में।
फिर भी न चैन आई , पीछे छुरी हैं चलाई,
कालनेमि बन के छाई,  प्रेम भक्ति के आंगन में।

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पाखण्डता की है हद , नही कोई भी है सरहद,
वो अपने बढ़ाने कद ,  गुमराह सबको करते ।
है कौन सी वो मकसद , पाने को जिसकी है जद,
पीकर के कपट का मद , है सबको छला करते ।

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हृदय में नही प्रीति , वह कौन सी है नीति,
करके वो राजनीति,  अपनो को उसने बांटा।
फिर चल गई वो रीति , नित बन रहे हैं भीति,
है सबकि आपबीती ,  है बो गए वो कांटा ।

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खुद को जरा सम्हालो ,  नई ज्ञान दीप जला लो,
इंसानियत को तुम बचा , लो इन क्रूर दानवो से ।
नई रीति तुम बना लो ,  प्रेम भूषण अब सजा लो,
मनभेद को अब टालो ,  मानव का मानवों से।

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अवतार हो तुम्ह राम का ,  है समय ये संग्राम का,
है मर्यादाएं नाम का ,  कर सायक अब सम्हालो।
है शोर त्राहिमाम का,   इन अधम दुष्टो के धाम का,
संधानो सर अंजाम का,  तरकश को अब सजा लो ।
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रचना =    कुर्मि रामावतार चन्द्राकर



रविवार, 28 फ़रवरी 2021

यादें {पहला प्यार}

पहला प्यार 
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कितने बरष है बीत गए पर ,
अब भी आंखों में मुस्काये,
जब कोई छेड़े तार दिल की,
दिल मे हलचल सी उठ जाए,
रह रह कर वो  चेहरा मेरे,
 ख्वाबो में है आ ही जाता ,
सच ही कहा है कहने वाले ,
पहला प्यार भुला नही जाता,

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याद मुझे आ ही जाती है,
बचपन की वो लम्हे अब भी, 
छुप के खाने को वो देती ,
मेले से कुछ लाती जब भी ,
मैं भी उसको देख देखकर ,
अपने सारे गम भूल जाता ,
सच ही कहा है कहने वाले ,
पहला प्यार भुला नही जाता।
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यह  मेरे मन मीन थे और,
वो सागर की जलराशि जैसी,
अटल तपस्वी था मैं तब और ,
वो मथुरा और काशी जैसी,
उनके स्वप्न भरे नयनों बीच,
मैं भी जीवन स्वप्न सजाता,
सच ही कहा है कहने वाले ,
पहला प्यार भुला नही जाता।

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उनकी मीठी बोली आज भी,
 गूंजती है कानों में ऐसे ,
मन बसन्त की  अमराई में ,
कोयल कुक रही हो जैसे ,
उनके आहट मात्र से मन ये ,
उत्सव का वह हुश्न सजाता,
सच ही कहा है कहने वाले ,
पहला प्यार भुला नही जाता।

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धीरे से छुपकर के घर से ,
मुझसे मिलने आ ही जाती ,
एक शिक्षक की भांति मुझे वो,
जीवन के सब गुण सिखाती ,
कभी कलम पुस्तक के बहाने ,
मैं भी उससे मिलने जाता ,
सच ही कहा है कहने वाले ,
पहला प्यार भुला नही जाता ।

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अवतार मुझे पल याद है अब भी ,
साथ मे मिलकर तारे गिनना ,
गली के नदियों में कागज की,
नाव चलाना साथ मे भींगना ,
निर्छल जीवन का वो मौसम ,
बार बार मुझे रुला ही जाता ,
सच ही कहा है कहने वाले ,
पहला प्यार भुला नही जाता ।

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 जब भी कभी मैं उसको देखु ,
एक तड़पन सी उठती मन मे ,
बिछुड़न की एहसास से उसकी,
दर्द मचल जाता जीवन मे ,
दिल की धड़कन वही पुराना ,
 रो रोकर फिर नगमे गाता,
सच ही कहा है कहने वाले ,
पहला प्यार भुला नही जाता ।
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नई आस

                 नई आस                कल्पना साकार होता दिख रहा है, आसमाँ फिर साफ होता दिख रहा है।। छाई थी कुछ काल से जो कालिमा, आज फिर से ध...